कहते है माँ से बड़ा कोई शब्द नहीं है, क्योंकि इसी में समय है ये सारा संसार, माँ जिसने हमें जनम दिया है और पाला भी है..पर पिता वो भी एक बहुत ही अहम हिस्सा है हमारी ज़िन्दगी के।
अरे याद है जब पापा ने पहली पर मेर ऊँगली पकड़ी थी, और में गिर गई थी तो क्या खा था पापा ने की बीटा दुबारा कोशीश करो ,जो कोशीश करता है वही सफल होता है,उस पल मेने पापा की सुनी और आगे चलने लगी..और हर मोड़ ,हर उलझन में कहते है कभी हार नहीं मानना हमेशा आगे बढ़ना है हमे ,,चाँद को छू लेना है हमें।
अगर माँ आपको दिन भर संभालती है तो पापा भी काम नहीं है आते ही कहते है की अब तो मेरी रानी/राजा मेरे पास रहेगा ,भुत मस्ती करेंगे हम। अगर माँ लाखो रिशते संभालती है तो पापा उनके पीछे होते है,उनका साथ देते है ,उनकी मदत है।
जब हम छोटे थे तो जब father's day आता तो माँ और हम सभी पापा के लिए तोफे लाते उनको बूत खुश रखते ,और उनकी लम्बी उमर की दुआ करते।
हां माना की father's day एक दिखावे सा लगता है क्योंकि हम हमारी मोहबत सिर्फ एक दिन नहीं दिखते, हम हर दिन पापा ओ खुश, ऐसा नहीं है की सिर्फ father's day पे हम पापा को प्यार करते उनके साथ घूमते , ये ना तो हमारी परम्परा है, न हमारे संस्कार.... ये तो विदेशी लोगो का चलन है पता है क्यों क्योंकि वो अपने काम में इतने वयस्थ होते है की उनके पास समय ही नहीं होता अपने माता-पिता के लिए , इस वजह से वो ये एक दिन अपने माता-पिता के लिए निकाल लेते है ,और दूसरी तो ये की ये father's day आता भी sunday को है ताकि कोई छुट्टी ना लेनी पड़े। पर हम भारती हमारे लिए तो हर दिन father's day है ,और हम ये दिन और ख़ुशी ये मनलेते है इस कास बनाकर , पिता की एक ही ख्वाइश होती है की बुढ़ापे में उनके बच्चे सहारे दे,पिता एक बच्चे को अपनी सारी खुशिया दे देता है, उसकी हर एक इच्छा पूरी करदेते है ,चाहे वो पर हो ही ना सके...जैसे उसके लिए महंगे कपडे लाना,खिलोने लाना,हर चीज़ बहुत लाड-प्यार से है वो...क्यों क्योंकि पिता है वो,यही सोचते है की मेरे बेटे/बी को सब अच्छा मिले ,कभी हक नहीं आये,हमेशा और बार बार मुझ से भी आगे बढ़ते जाए,कही कोई दुःख ना आये, कभी कोई बुरा साया ना आये,हर सफल हो, और सबसे अहम बात ई वो उनका नाम रोशम करें..और वो गर्व की ये हमारी बेटी/हमारी बेटा।
जब माँ घर पर नहीं होती थी तो में भुत खेलते, साथ कहना बनाते पता नहीं पापा रोटी को क्या बनादेते थे,और वो सब्ज़ी पता नहीं उसके असली जाते थे,और भी वो सब हम कहते मू बनाके ,वो भी क्या हसीन पल थे।
कभी कभी तो यू लगता है माँ मुझसे नहीं भाई से ज्यादा प्यार करती है...पर मेरे पापा मेको भुत प्यार करते है। .में तो उनकी राजकुमारी हु ना...अगर गलती मेरी होती तो भी पापा हमेशा भाई को डांटते थे...मेरी और भाई की लड़ाई को रोकते है वो।
पिता ने ही सिखाया मुझे प्यार और पैसो की सिखाया मुझे बोलना,माँ के बाद मेने पापा का ही नाम लिया था...पिता वो जो शान से कहते है ये मेरी बेटी है..पिता वो जो डांट से बचाते है...पिता वो जो मेरे गमो में मुझे ख़ुशी दे..पिता वो जो मेरे लिए सारे जहां से खुशियाँ ढूंड लाये....और पापा मेरी हर ज़िद को पूरा करते है...कहे मुझे १० रुपये की चाहिए हो या १०००रुप्ये की वो मेरे लिए कहि से भी कैसे भी लादेते है....और मेरी चुलबुली बाते पे मुश्कुराते है..मेरे गुस्से को पल में शांत करदेते है..में भुत खुशनसीब हू की आप मेरी ज़िन्दगी में मुझे पिता का प्यार...जब मुझे कोई चोट लगती ही तो दर्द उनको होता है।
मेरा आप सहारा बनना
हर मोड़ पे मुझे हिम्मत देना
हर गम में मुझे संभल लेना
हर आंसू को छूमंतर करदेना
हर गलती को माफ़ करदेना
हमेशा मेरे साथ रहना पापा...... :) :) :)
अरे याद है जब पापा ने पहली पर मेर ऊँगली पकड़ी थी, और में गिर गई थी तो क्या खा था पापा ने की बीटा दुबारा कोशीश करो ,जो कोशीश करता है वही सफल होता है,उस पल मेने पापा की सुनी और आगे चलने लगी..और हर मोड़ ,हर उलझन में कहते है कभी हार नहीं मानना हमेशा आगे बढ़ना है हमे ,,चाँद को छू लेना है हमें।
अगर माँ आपको दिन भर संभालती है तो पापा भी काम नहीं है आते ही कहते है की अब तो मेरी रानी/राजा मेरे पास रहेगा ,भुत मस्ती करेंगे हम। अगर माँ लाखो रिशते संभालती है तो पापा उनके पीछे होते है,उनका साथ देते है ,उनकी मदत है।
जब हम छोटे थे तो जब father's day आता तो माँ और हम सभी पापा के लिए तोफे लाते उनको बूत खुश रखते ,और उनकी लम्बी उमर की दुआ करते।
हां माना की father's day एक दिखावे सा लगता है क्योंकि हम हमारी मोहबत सिर्फ एक दिन नहीं दिखते, हम हर दिन पापा ओ खुश, ऐसा नहीं है की सिर्फ father's day पे हम पापा को प्यार करते उनके साथ घूमते , ये ना तो हमारी परम्परा है, न हमारे संस्कार.... ये तो विदेशी लोगो का चलन है पता है क्यों क्योंकि वो अपने काम में इतने वयस्थ होते है की उनके पास समय ही नहीं होता अपने माता-पिता के लिए , इस वजह से वो ये एक दिन अपने माता-पिता के लिए निकाल लेते है ,और दूसरी तो ये की ये father's day आता भी sunday को है ताकि कोई छुट्टी ना लेनी पड़े। पर हम भारती हमारे लिए तो हर दिन father's day है ,और हम ये दिन और ख़ुशी ये मनलेते है इस कास बनाकर , पिता की एक ही ख्वाइश होती है की बुढ़ापे में उनके बच्चे सहारे दे,पिता एक बच्चे को अपनी सारी खुशिया दे देता है, उसकी हर एक इच्छा पूरी करदेते है ,चाहे वो पर हो ही ना सके...जैसे उसके लिए महंगे कपडे लाना,खिलोने लाना,हर चीज़ बहुत लाड-प्यार से है वो...क्यों क्योंकि पिता है वो,यही सोचते है की मेरे बेटे/बी को सब अच्छा मिले ,कभी हक नहीं आये,हमेशा और बार बार मुझ से भी आगे बढ़ते जाए,कही कोई दुःख ना आये, कभी कोई बुरा साया ना आये,हर सफल हो, और सबसे अहम बात ई वो उनका नाम रोशम करें..और वो गर्व की ये हमारी बेटी/हमारी बेटा।
जब माँ घर पर नहीं होती थी तो में भुत खेलते, साथ कहना बनाते पता नहीं पापा रोटी को क्या बनादेते थे,और वो सब्ज़ी पता नहीं उसके असली जाते थे,और भी वो सब हम कहते मू बनाके ,वो भी क्या हसीन पल थे।
कभी कभी तो यू लगता है माँ मुझसे नहीं भाई से ज्यादा प्यार करती है...पर मेरे पापा मेको भुत प्यार करते है। .में तो उनकी राजकुमारी हु ना...अगर गलती मेरी होती तो भी पापा हमेशा भाई को डांटते थे...मेरी और भाई की लड़ाई को रोकते है वो।
पिता ने ही सिखाया मुझे प्यार और पैसो की सिखाया मुझे बोलना,माँ के बाद मेने पापा का ही नाम लिया था...पिता वो जो शान से कहते है ये मेरी बेटी है..पिता वो जो डांट से बचाते है...पिता वो जो मेरे गमो में मुझे ख़ुशी दे..पिता वो जो मेरे लिए सारे जहां से खुशियाँ ढूंड लाये....और पापा मेरी हर ज़िद को पूरा करते है...कहे मुझे १० रुपये की चाहिए हो या १०००रुप्ये की वो मेरे लिए कहि से भी कैसे भी लादेते है....और मेरी चुलबुली बाते पे मुश्कुराते है..मेरे गुस्से को पल में शांत करदेते है..में भुत खुशनसीब हू की आप मेरी ज़िन्दगी में मुझे पिता का प्यार...जब मुझे कोई चोट लगती ही तो दर्द उनको होता है।
मेरा आप सहारा बनना
हर मोड़ पे मुझे हिम्मत देना
हर गम में मुझे संभल लेना
हर आंसू को छूमंतर करदेना
हर गलती को माफ़ करदेना
हमेशा मेरे साथ रहना पापा...... :) :) :)
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