एक खत माँ के लिय !!!!



एक खत माँ के लिय !!!!


मैं विरानगी की हद ना पार कर जाऊ 
इसिलिय बनाया है माँ को मेरे लिय, 

मैं सागर की आड़ में नदी को ना भूल जाऊ 
इसिलिय माँ का आंचल भगवान ने दिया है मुझे , 

मैं किसी की इज्जत ना छीन लू
इसिलिय माँ ने मुझसे डाट डाट कर बडा किया, 

मैं जीवन में कंकर समझ पत्थर को ना देख सकू 
इसिलिय माँ की आँखे रास्ता दिखाती है मुझे,

मैं किसी की तलब में अपनों को ना भूल जाऊ
इसिलिय माँ ने रिश्तो की अहमियत समझाई है मुझे,
मैंकिसी के बुरे साये में किसी की आंच ना चुरा लू 
इसिलिय माँ ने मुझे मेरा टिफ़िन बांटकर खाना सिखाया है ,
मैं किसी रास्ते पर खो ना जाऊ 
इसिलिय माँ ने हर रात तारो से रूबरू कराया है मुझे',
मैं कल तलक अपनी सूरत ना भूल जाऊ 
इसिलिय मुझे ये याद रखना है की मैं किसी की कोख में था 9माह के लिय\\
धन्यवाद..... 
ये शब्द बडा ही छोटा लगता है क्युकी ...माँ ने धन्यवाद् से भी ज्यादा कुछ किया है !हमारे लिय 
सारे संसार की जननी है माँ 
हर कण में छुपी है माँ की ममता 
हर नदी में है माँ की पवित्रता \\ 
कोई माँ सा नही है इस दुनिया में 
माँ के प्यार ने और दुलार ने हमको सिखाया है जीना !!
-Ritika Gusaiwal

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